🌧️ Adults · literary + suspense · हिन्दी · 3 min

आख़िरी लालटेन की रोशनी

उन सभी के लिए, जिन्होंने किसी अपने को खोकर भी मुस्कुराना सीखा।

Page 1 of 4 · बारिश में झूलती कागज़ की लालटेन

केरल की मूसलाधार बारिश में नारियल के पेड़ों के बीच टंगे कागज़ के लालटेन धीरे-धीरे झूल रहे थे। रात के दो बजे अस्पताल की गश्त पूरी करके प्रिया बरामदे में खड़ी हुई, जहाँ गीली मिट्टी और भीगी सड़कों की सोंधी महक फैली थी। तभी उसकी जेब में रखा फोन बज उठा। स्क्रीन पर उसके छोटे भाई का नाम चमका—वही भाई, जिसने सालों से कभी पहले फोन नहीं किया था। उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी थरथराहट थी, जैसे वह किसी छांव में छुपकर बोल रहा हो। उसने सिर्फ इतना कहा, "प्रिया, अगर तुम आ सकती हो, तो शहर आ जाओ। मैं उस बात को और नहीं छुपा सकता।" इससे पहले कि प्रिया कुछ पूछती, कॉल कट गया।

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